Friday, May 29, 2009

हाए गज़ब कहीं तारा टूटा...सुनिए आशा ताई को इस प्यारे गीत में

अगर आप से मैं ये पूछूँ कि गुज़रे ज़माने जब सिनेमा के पर्दे का रंग श्वेत श्याम हुआ करता था तो अभिनय और खूबसूरती दोनों के लिहाज़ से आपकी पसंदीदा अभिनेत्री कौन थी तो आप में से शायद ज्यादातर लोगों का जवाब मधुबाला ही हो। पर जब मैं अपनी आँखे बंद कर स्मृति पटल पर जोर देता हूँ तो इन दोनों कसौटियों पर मन में बस एक ही अदाकारा की छवि उभरती है..साहब बीवी और गुलाम, कागज़ के फूल, खामोशी और तीसरी कसम वाली प्यारी वहीदा जी। यूँ तो वहीदा जी ने रंगीन फिल्मों में भी काम किया पर श्वेत श्याम रंगों में भिन्न भिन्न फिल्मों में निभाए गए किरदारों और उन पर फिल्माए गए गीतों को मैं हमेशा अपने ज़ेहन के करीब पाता हूँ।



ऐसा ही एक गीत था १९६६ में गीतकार शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फिल्म तीसरी कसम का। साठ के दशक में बनी ये फिल्म रेणु की दिल छूती पटकथा, नायक नायिका के जबरदस्त अभिनय और अपने स्वर्णिम गीतों की वज़ह से मेरी सबसे प्रिय फिल्मों में एक रही है। यूँ तो तीसरी कसम के तमाम गीत अव्वल दर्जे के हैं पर उनमें से तीन मुझे खास तौर पर पसंद हैं।

आज जिस गीत को आप के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ उसे गाया था आशा भोसले ने...पता नहीं इस गीत के मुखड़े में क्या खास बात है कि बस उसे सुनते ही मन चुहल और मस्ती के मूड में आ जाता है। गीतकार शैलेंद्र ने ग्रामीण पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म के बोल भी नौटंकी के माहौल में ध्यान रख कर लिखे हैं।तो आइए सुनें संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन द्वारा संगीतबद्ध इस गीत को



हाए गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयाँ ने लूटा
पहला तारा अटरिया पे टूटा
दाँतो तले मैंने दाबा अगूँठा
लूटा रे लूटा सावरियाँ ने लूटा
हाए गज़ब कहीं तारा टूटा ...


हाए गज़ब कहीं तारा टूटा
दूसरा तारा बजरिया में टूटा
देखा है सबने मेरा दामन छूटा
लूटा रे लूटा सिपहिया ने लूटा
हाए गज़ब कहीं तारा टूटा ....


तीसरा तारा फुलबगिया में टूटा
फूलों से पूछे कोई, है कौन झूठा
लूटा रे लूटा दरोगवा ने लूटा
हाए गज़ब कहीं तारा टूटा ....


उस ज़माने में ग्रामीण संस्कृति में मनोरंजन के एकमात्र माध्यम के रूप में नौटंकी का क्या योगदान था ये बात इस गीत को देख कर ही आप महसूस कर सकते हैं। नाचवाली के ठुमके कहीं फूलों की खुशबू से भींगे भावनात्मक प्रेम को जागृत कर रहे हैं तो कहीं रुपये के दंभ में डूबी हवस को।





तीसरी कसम के अपने अन्य पसंदीदा गीतों को आप तक पहुँचाने का क्रम आगे भी ज़ारी रहेगा..

8 comments:

Udan Tashtari on Fri May 29, 08:49:00 AM 2009 said...

बहुत पहले देखी थी यह फिल्म..आज फिर तरोताजा हो गया यह गीत यू ट्यूब पर देख. आभार.

श्यामल सुमन on Fri May 29, 08:50:00 AM 2009 said...

सुन्दर पोस्ट। पुरानी याद ताजा हो गयी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Nirmla Kapila on Fri May 29, 09:07:00 AM 2009 said...

वाह ये मोती कहाँ से ढूँढ लिया आभार्

कंचन सिंह चौहान on Fri May 29, 12:28:00 PM 2009 said...

इस फिल्म के गीतों में लोकगीतों का सुर सुनाई देता है, यही इ फिल्म के गानो की विशेषता हा....! सदाबहार गीत...!

रविकांत पाण्डेय on Fri May 29, 01:37:00 PM 2009 said...

इस गीत में लोकगीत की मिठास भरी हुई है। यही कारण है कि इसे बार-बार सुनने को जी करता है।

Jugaad_Owner on Fri May 29, 03:01:00 PM 2009 said...

Hello. i loved to read your blog.
the content and theme of writing is quite nice.
Help me with your suggestion about my blog
http://jugaadworld.blogspot.comhope to have your precious suggestions about my blog.

अभिषेक ओझा on Fri May 29, 05:59:00 PM 2009 said...

फिल्म, इसके गीत और रेनू की वो कहानी जिस पर यह फिल्म बनी... सब कमाल के हैं !

Nirmla Kapila on Wed Jun 03, 08:21:00 AM 2009 said...

maneesh jee agar meree pasand kaa geet suna saken to kripa hogee
tujh se naaraaj nahin ai zindagee
hairaan hoon mai tere khaamosh savaalon se pareshaan hoon mai
aabhaar

 

Disclaimer

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत, और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस अव्यवसायिक चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie