जिन्दगी यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादें...क्यूँ ना उन्हें जिन्दा करें अपने प्रिय गीतों, गजलों और कविताओं के माध्यम से!
अपनी एक शाम उधार देंगे ना ...उन यादगार पलों को बाँटने के लिये ..
कई बार आप सब ने गौर किया होगा। रोजमर्रा की जिंदगी भले ही कितने तनावों से गुज़र रही हो, किसी से हँसी खुशी दो बातें कर लेने से मन हल्का हो जाता है। थोड़ी सी मुस्कुराहट मन में छाए अवसाद को कुछ देर के लिए ही सही, दूर भगा तो डालती ही है। पर दिक्कत तब होती है जब ऐसे क्षणों में आप बिलकुल अकेले होते हैं। बात करें तो किससे , मुस्कुराहट लाएँ तो कैसे ?
पर सच मानिए अगर ऍसे हालात से आप सचमुच गुजरते हैं तो भी किसी का साथ हर वक़्त आपके साथ रहता है। बस गौर करने की जरूरत भर है। जी हाँ, मेरा इशारा आपके चारों ओर फैली उस प्रकृति की ओर है जिसमें विधाता ने जीवन के सारे रंग समाहित किए हैं।
चाहे वो फुदकती चिड़िया का आपके बगीचे में बड़े करीने से दाना चुनना हो... या फिर बाग की वो तितली जो फूलों के आस पास इस तरह मँडरा रही हो मानो कह रही हो..अरे अब तो पूरी तरह खिलो, नया बसंत आने को है और अभी तक तुम अपनी पंखुड़ियां सिकोड़े बैठे हो ? या वो सनसनाती हवा जिसका स्पर्श एक सिहरन के साथ मीठी गुदगुदी का अहसास आपके मन में भर रहा हो.... या फिर झील का स्थिर जल जो हृदय में गंभीरता ला रहा हो... या उफनती नदी की शोखी जो मन में शरारत भर रही हो.. या बारिश की बूदें जो पुरानी यादों को फिर से गीला कर रहीं हों...
हम जितने तरह के भावों से अपनी जिंदगी में डूबते उतराते हैं, सब के सब तो हैं इस प्रकृति में किसी ना किसी रूप में... मतलब ये कि अपने आस पास की फ़िज़ा को जितना ही महसूस करेंगे, अपने दर्द, अपने अकेलेपन को उतना ही दूर छिटकता पाएँगे।
कुछ ऍसी ही बातें प्रसून जोशी ने अपने इस गीत में करनी चाही हैं जो फिल्म फिर मिलेंगे से लिया गया है। मुझे ये गीत बेहद बेहद पसंद है और इसीलिए ये मेरी पसंद के गीतों की सूची में वर्ष २००४ में अव्वल नंबर पर रहा था। जोशी जी के काव्यात्मक गीतों में ये मुझे सबसे बेहतरीन लगता है। इसे बड़ी संवेदनशीलता से गाया है बाम्बे जयश्री ने और धुन दी है शंकर एहसान और लॉ॓ए ने जो कमाल की है। अब गीत चूंकि मुझे बेहद पसंद है अतः इसे गुनगुनाने का लोभ संवरण नहीं कर सका...
खुल के मुसकुरा ले तू, दर्द को शर्माने दे बूदों को धरती पर साज एक बजाने दे हवाएँ कह रही हैं आजा झूमें ज़रा गगन के गाल को चल, जा के छू लें ज़रा
झील एक आदत है तुझमें ही तो रहती है और नदी शरारत है, तेरे संग बहती है उतार ग़म के मोजे जमीं को गुनगुनाने दे कंकरों को तलवों में, गुदगुदी मचाने दे खुल के मुसकुरा ले तू, दर्द को शर्माने दे...
बाँसुरी की खिड़कियों पे सुर क्यूँ ठिठकते हैं आँख के समंदर क्यूँ बेवजह छलकते हैं तितलियाँ ये कहती हैं अब वसंत आने दे जंगलों के मौसम को बस्तियों में छाने दे खुल के मुसकुरा ले तू, दर्द को शर्माने दे...
खूबसूरत बोल और बेहतरीन संगीत के इस संगम को कभी फुर्सत के क्षणों में सुनें, आशा है ये गीत आपको भी पसंद आएगा।
मनीषजी, इस गीत को आज पहली बार सुना और बार बार सुना । पिछ्ले कई वर्षों से (~५) नयी फ़िल्मों के संगीत से एकदम बेखबर हूँ । आज ही पारूल जी के चिट्ठे पर पहेली फ़िल्म का एक मधुर गीत सुना था ।
लगता है दर्द-ए-डिस्को जैसे गीतों के साथ साथ अभी भी कुछ अच्छे गीत बन रहे हैं जिनको सुनना आनन्ददायक होता है :-)
मेरा प्रिय गीत है ये । प्रसून जी से विविध भारती पर जब इंटरव्यू किया था तब इस गीत पर लंबी चर्चा हुई थी । ये उनके भी पसंदीदा गीतों में से है । मुझे जो पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद है वो है 'उतार गम के मोजे जमीं को गुनगुनाने दो' । बॉम्बे जयश्री ने मेरी जानकारी में केवल दो हिंदी गीत गाये हैं । इसके अलावा दूसरा गीत है 'जरा जरा बहकता है' फिल्म रहना है तेरे दिल में । उनके बारे में ज्यादा जानकारी ये रही http://www.musicalnirvana.com/carnatic/bombay_jayashri.html#Profile फिर से धन्यवाद इस गाने को लाने के लिए । तुमने बढि़या गुनगुनाया है । मजा आया ।
इस तेज रफ्तार जिंदगी की उथल पुथल से दूर चंद लमहे आप सब से बांटने की ख्वाहिश रखता हूँ । मैं यहाँ आऊँगा अपने प्रिय गीतों, गजलों, उपन्यासों, कविताओं और सफर में बीते उन संस्मरणों के साथ जो मुझे एक दूसरी ही दुनिया मेँ खींच ले जाते है और जिन्हें महसूस कर अपने आप को अभिव्यक्त करने की इच्छा बलवती हो जाती है ...
5 comments:
मनीषजी,
इस गीत को आज पहली बार सुना और बार बार सुना । पिछ्ले कई वर्षों से (~५) नयी फ़िल्मों के संगीत से एकदम बेखबर हूँ । आज ही पारूल जी के चिट्ठे पर पहेली फ़िल्म का एक मधुर गीत सुना था ।
लगता है दर्द-ए-डिस्को जैसे गीतों के साथ साथ अभी भी कुछ अच्छे गीत बन रहे हैं जिनको सुनना आनन्ददायक होता है :-)
मेरा प्रिय गीत है ये । प्रसून जी से विविध भारती पर जब इंटरव्यू किया था तब इस गीत पर लंबी चर्चा हुई थी । ये उनके भी पसंदीदा गीतों में से है । मुझे जो पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद है वो है 'उतार गम के मोजे जमीं को गुनगुनाने दो' । बॉम्बे जयश्री ने मेरी जानकारी में केवल दो हिंदी गीत गाये हैं । इसके अलावा दूसरा गीत है 'जरा जरा बहकता है' फिल्म रहना है तेरे दिल में । उनके बारे में ज्यादा जानकारी ये रही
http://www.musicalnirvana.com/carnatic/bombay_jayashri.html#Profile
फिर से धन्यवाद इस गाने को लाने के लिए । तुमने बढि़या गुनगुनाया है । मजा आया ।
bahut sundar geet...aapney gaya bhi bahut khuub hai......shukriyaa
गीत बढिया है और आपका गुनगुनाना भी!!
बहुत खूबसूरत गीत.
प्रसून बाबू के काम का तो पहले से ही प्रशंशक रहा हूँ. आपको भी धन्यवाद.
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