tag:blogger.com,1999:blog-24770698.post-40117770947707780472008-03-18T14:22:00.010+05:302008-12-09T20:38:25.300+05:30आइए झांके हृदय गवाक्ष के अंदर और मिलें कंचन सिंह चौहान से..आज आपको मिलवाते हैं हमारी साथी महिला चिट्ठाकार कंचन सिंह चौहान से जिनसे २९ फरवरी को मेरी मुलाकात लखनऊ में हुई थी। कंचन चौहान से पहला संपर्क आरकुट के गोपाल दास नीरज समूह पर हुआ था।वहाँ से मैं उनकी प्रोफाइल पर गया था तो ये पंक्तियाँ पढ़कर मंत्रमुग्ध हो गया थानित्य समय की आग में जलना,नित्य सिद्ध सच्चा होना है,माँ ने दिया नाम जब कंचन,मुझको और खरा होना है मुझे जीवन में अक्सर ऍसे लोग अच्छे लगे हैं Manish Kumarhttp://www.blogger.com/profile/10739848141759842115manish_kmr1111@yahoo.com21