Sunday, May 10, 2009

किताबों से कभी गुजरो तो यूँ किरदार मिलते हैं...

किताब पढ़ने का शौक मुझे अपने माता पिता से मिला है। बचपन में वे अक्सर कहा करते थे कि किताबें हमारी भाषा को समृद्ध करती हैं, हमारे विचारों को विस्तार देती हैं और हमें दूसरे नज़रिए से सोचने को मजबूर करती हैं। उनकी बातों ने पुस्तकें पढ़ने की आदत डलवा दी। हाँ ये जरुर हुआ कि पढ़ाई लिखाई, नौकरी की भाग दौड़ में पुस्तकें पढ़ने की बारम्बारता कम ज्यादा होती रही।

आजकल तो पुस्तकें पढ़ना और वो भी हिंदी पुस्तकों को पढ़ना प्रचलन में नहीं रह गया है या यूँ कहूँ कि आउट आफ फैशन हो गया है। ऍसे में पुस्तक ना पढ़ने वालों को गुलज़ार साहब की ये पंक्तियाँ याद दिलाना चाहता हूँ

किताबों से कभी गुजरो तो यूँ किरदार मिलते हैं
गये वक्तों की ड्योढ़ी पर खड़े कुछ यार मिलते हैं
जिसे हम दिल का वीराना समझ छोड़ आए थे
वहीं उजड़े हुए शहरों के कुछ आसार मिलते हैं


पर मैंने अपने में ये प्रवृति बनाई रखी है और जब कार्यालयी दौरों में रहता हूँ तो यात्रा के दौरान अपने साथ किताब जरूर रखता हूँ। जब से चिट्ठाकारी शुरु की है समय समय पर आपको उन किताबों के बारे में अपनी राय से अवगत कराता रहा हूँ।

चिट्ठे की तीसरी वर्षगाँठ पर आपसे वायदा था कि जिस तरह इस चिट्ठे पर प्रस्तुत गीतों , ग़ज़लों और कविताओं की लिंकित सूची साइडबार में बना कर रखी है वैसे ही सूची पुस्तक चर्चा से संबंधित लेखों की भी बनाऊँ। तो अपने वायदे के मुताबिक प्रस्तुत है ये सूची...

इस चिट्ठे पर आप इन पुस्तकों के बारे में भी पढ़ सकते हैं

  1. असंतोष के दिन
    Asantosh Ke Din by Dr. Rahi Masoom Raza

  2. मैं बोरिशाइल्ला
    Main Borishailla by Mahua Maji

  3. जल्लाद की डॉयरी
    Jallad Ki Diary by Shashi Warior

  4. गुनाहों का देवता
    Gunahon Ka Devta by Dharmveer Bharti

  5. जालियाँवाला बाग त्रासदी
    Massacre at Jallianwala Bagh by Stanley Wolpert

  6. कसप
    Kasap by Manohar Shyam Joshi

  7. गोरा
    Gora by Ravindra Nath Tagore

  8. महाभोज
    Mahabhoj by Mannu Bhandari

  9. क्याप
    Kyap by Manohar Shyam Joshi

  10. एक इंच मुस्कान,
    Ek Inch Muskaan by Rajendra Yadav & Mannu Bhandari

  11. लीला चिरंतन,
    Leela Chirantan by Ashapoorna Devi

  12. क्षमा करना जीजी
    Kshama Karna Jiji by Narendra Kohli

  13. मर्डरर की माँ
    Murderer ki Maan by Mahashweta Devi

  14. दो खिड़कियाँ
    Do Khidkiyan by Amrita Preetam

  15. हमारा हिस्सा
    Stories on Women Empowerment

  16. मधुशाला
    Madhushala by Harivansh Rai Bachchan

  17. मुझे चाँद चाहिए
    Mujhe Chand Chahiye by Surendra Verma

  18. कहानी एक परिवार की
    Kahani Ek Pariwaar Kee by Gurucharan Das

  19. तीन भूलें जिंदगी की
    Three Mistakes of My Life by Chetan Bhagat

8 comments:

Udan Tashtari on Sun May 10, 04:39:00 PM 2009 said...

यह बहुत अच्छा कार्य किया आपने. आभार.

कुलवंत हैप्पी on Sun May 10, 04:59:00 PM 2009 said...

किताबों से कभी गुजरो तो यूँ किरदार मिलते हैं
गये वक्तों की ड्योढ़ी पर खड़े कुछ यार मिलते हैं
जिसे हम दिल का वीराना समझ छोड़ आए थे
वहीं उजड़े हुए शहरों के कुछ आसार मिलते हैं

इन पंक्तियों में बहुत सचाई है, जिन चीजों को आदमी बहुत पीछे छोड़ आता है, वो किताबों में मिलती है..कभी किसी किताब के पन्ने पर पनघट पर पानी भरती गोरियों की टोली का जिक्र गांव के बीच बने कुएं की याद को ताजा कर देता है.. वैसे भी आप कार्य सराहनीय है..

नीरज गोस्वामी on Sun May 10, 06:01:00 PM 2009 said...

किताबों से दोस्ती सबसे अच्छी दोस्ती है क्यूँ किताब का दोस्त कभी दुश्मनी नहीं करता...हमेशा आपकी मदद करता है...हमेशा हर सुख दुःख में आपका साथ देता है...मेरी भी किताबों से दोस्ती है जिनके बिना रहना मुमकिन नहीं लगता...शुक्रिया लिंक देने का.
नीरज

P.N. Subramanian on Sun May 10, 10:12:00 PM 2009 said...

सहूलियत हो गयी. आभार

सजीव सारथी on Mon May 11, 09:58:00 AM 2009 said...

kitabon se kabhi gujro jagjit s egaaya tha gulzaar ke daharawahik "kirdaar" ke liye...bahut search kiya par iska audio nahi mila :(

Mumukshh Ki Rachanain on Tue May 12, 11:24:00 AM 2009 said...

यह बहुत अच्छा कार्य किया आपने.

लिंक देने का आभार.

सर्वेश दुबे on Wed Sep 02, 10:32:00 PM 2009 said...

मनीष जी,
आज पहली बार आपका ब्लॉग देखा तो सबसे पहले आप की कवितओं की लिस्ट में चला गया और आप की कविता पढ़ी पहली कविता पढ़ के ही आप को लिखने के लिए मजबूर हो गया शायद नही भी लिखता तो आप मेरा कुछ बिगाड़ नही लेते पर मेरे लिकने का मकसद ये है की आप उपन्यासों को और पढ़े (शायद आप पढ़ते होंगे लेकिन जिन उपन्यासों की बात कर रहा हूँ वो कोई और हैं )
आपकी पुस्तकों की लिस्ट में मैं कुछ और उपन्यासों का नम देखना चाहता हूँ

Manish Kumar on Wed Sep 02, 10:32:00 PM 2009 said...

सर्वेश जी
यहाँ उन्हीं किताबों का जिक्र है जिसे मैंने पिछले तीन साल यानि ब्लागिंग शुरु करने के बाद पढ़ा। वैसे आशापूर्णा देवी, रेणु , मन्नू भंडारी, श्रीलाल शुक्ल, प्रेमचंद की रचनाएँ मुझे बेहद प्रिय रही हैं।
पहले पढ़ी हुई किताबों के बारे में उस वक़्त डॉयरी में लिखा करता था। फिलहाल बस इतना ही समय निकाल पाता हूँ कि जो अब पढ़ूँ उसके बारे में अपने विचार सहेज कर रख सकूँ ।

 

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