Sunday, December 09, 2007

IIT Bombay और पोवई झील की एक शाम, मेरे कैमरे की नज़र में...

नवंबर का आखिरी हफ्ता IIT Bombay में स्थित पोवई लेक के आस-पास गुजरा था। दिन तो अध्ययन में गुजर जाता था, पर सुबह और शामें अपनी हुआ करती थीं। मुंबई की चिरपरिचित भीड़भाड़ से निकल कर जब आप आई. आई. टी. का के आहाते में आते हैं तो सर्वत्र हरियाली देख मन पुलकित हो उठता है। इन्हीं दृश्यों को अपनी यादों में सहेजने के लिए मैंने इन्हें अपने कैमरे में क़ैद करने की कोशिश की है। तो आप भी चलिए ना इस झील के आस पास के इलाके में मेरे साथ सैर पर ...

वैसे तो मुंबई में उजाला छः साढ़े छः बजे तक आ जाता है पर मैं जब वन विहार गेस्ट हाउस के बाहर निकला तो सात बजने वाले थे। सामने था पेड़ों की झुंड के बीच से झांकता ये कृत्रिम ताल..


हम ही हैं इस ताल के स्थायी निवासी...





ट्रेनि्ग के बीच विश्राम करते मेरे रूममेट। पीछे दिख रही है पोवई झील



और कैमरे में क़ैद किया मेरा सबसे खूबसूरत लमहा। झील के बीच ताड़ वृक्षो के बीच ढलता सूरज। देखिए तो जाते-जाते भी आकाश को कैसी लालिमा दे जाता है। सूरज के डूबने के बाद भी आसमान के रंगों को बदलते देखना कितना सम्मोहक है ना?










जहाँ प्रकृति का सौंदर्य इस कदर बिखरा हो, वहाँ की वादियों से प्रेम दूर कैसे रह सकता है। बाँस की बल्लियों पर स्थित इस लवर्स प्वाइंट पर एक प्रेमी युगल।

11 comments:

अनिल रघुराज said...

बताइये, हम मुंबई में पवई के एकदम पास रहते हुए भी आईआईटी की ये मनोरम छटा से दूर रहे और आपके कैमरे की नजर से इसका आनंद ले पा रहे हैं। इतनी खूबसूरत तस्वीरें उपलब्ध कराने के लिए शुक्रिया, खासकर झील के किनारे डूबते सूरज की।

विकास कुमार said...

सही है, बहुत सुंदर कैच किया है. :)

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर, शानदार!

vimal verma said...

तो आप जानदार छायाकार भी हैं? उस शाम हम थोड़ा अंधेरे में इस जगह पर पहुंचे थे पर आपने तस्वीर बहुत कुछ कह रही है,शानदार

Pramod Singh said...

देख रहा हूं, बाबू, आशियां वाली छटा अभी बदली नहीं है!.. इतना मोह है?..

Srijan Shilpi said...

मुम्बई में ऐसे सुन्दर प्राकृतिक नजारे होने की कल्पना भी नहीं की थी। बेहतरीन तस्वीरें। वाह....

yunus said...

मनीष शानदार तस्‍वीरें थीं । आखिरी वाली तस्‍वीर मुझे सबसे अच्‍छी लगी । मजा आ गया । कभी कभी खाली कैमेरा ही चलाते रहा करो । देखो हम लोग कितने मजे लूट रहे हैं तुम्‍हारे कैमेरे के सहारे ।

कंचन सिंह चौहान said...

वाह! इसे कहते हैं बहुमुख प्रतिभा! छायाकारी का बेहतरीन नमूना!

Sanjeet Tripathi said...

वाह!! बहुत बढ़िया तस्वीरें!

Manish said...

आप सब का धन्यवाद तस्वीरों को सराहने का.
कौन सा मोह प्रमोद जी ?

anitakumar said...

वाह मनीष जी आप फ़ोटोग्राफ़र भी बड़िया हैं